Anthropic IPO | IPO से पहले ही कर्मचारी बन सकते हैं करोड़पति? शेयरों पर लोन का ये नया फॉर्मूला क्या है?
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Startup Employee Shares
निजी स्टार्टअप कंपनियों के कर्मचारी अपने शेयरों के बदले लोन लेकर नकदी जुटा सकते हैं।
शेयर बेचे बिना वित्तीय जरूरतें पूरी करने का विकल्प लोकप्रिय हो रहा है।
ब्याज दर, टैक्स और शेयरों के मूल्य में गिरावट इस व्यवस्था के प्रमुख जोखिम हैं।
New Delhi / क्या किसी कंपनी के शेयर बेचने या उसके आईपीओ का इंतजार किए बिना भी करोड़ों की संपत्ति का फायदा उठाया जा सकता है? अमेरिका में स्टार्टअप कर्मचारियों के लिए एक नया वित्तीय विकल्प उभर रहा है, जो उनकी कमाई की तस्वीर बदल सकता है।
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के आईपीओ यानी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी के बीच कर्मचारियों की संपत्ति को लेकर एक नया वित्तीय ट्रेंड सामने आ रहा है। अब चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि किसी कंपनी के शेयर कब बाजार में आएंगे, बल्कि यह भी है कि कर्मचारी आईपीओ से पहले ही अपने शेयरों की मदद से पैसा कैसे जुटा सकते हैं।
दरअसल, अमेरिका में एंथ्रोपिक जैसी बड़ी निजी कंपनियों के संभावित आईपीओ से कर्मचारियों को बड़ी संपत्ति मिलने की उम्मीद है। लेकिन कंपनी के शेयरों की कीमत बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों के सामने एक समस्या रहती है। जब तक कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं होती या निजी बाजार में शेयर बेचने का अवसर नहीं मिलता, तब तक उनकी कागजी संपत्ति को नकदी में बदलना आसान नहीं होता।
शेयर बेचें या उनके बदले लोन लें?
आमतौर पर कर्मचारियों के पास अपने शेयर बेचकर पैसा जुटाने का विकल्प होता है। लेकिन ऐसा करने से भविष्य में शेयरों की कीमत बढ़ने पर मिलने वाला संभावित लाभ छूट सकता है। इसके अलावा, शेयर बेचने पर टैक्स भी लग सकता है।
अब एक दूसरा विकल्प चर्चा में है—अपने शेयरों को गिरवी रखकर लोन लेना। निजी बैंकिंग की दुनिया में यह तरीका पहले से मौजूद है, जहां अमीर निवेशक अपनी संपत्ति के बदले कर्ज लेते हैं। अब यही मॉडल निजी स्टार्टअप कंपनियों के कर्मचारियों तक पहुंचने लगा है।
इस व्यवस्था में कर्मचारी अपने शेयर बेचे बिना नकदी प्राप्त कर सकते हैं और भविष्य में कंपनी के शेयरों की संभावित बढ़त में अपनी हिस्सेदारी बनाए रख सकते हैं। हालांकि, यह विकल्प जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है। शेयरों की कीमत गिरने, लोन की शर्तों और ब्याज भुगतान के कारण कर्मचारियों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है।
निजी कंपनियों में बढ़ रही है संपत्ति
हर स्टार्टअप कर्मचारी करोड़पति नहीं बनता। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर स्टार्टअप कंपनियां अरबों डॉलर के मूल्यांकन तक नहीं पहुंचतीं। ऐसे में कर्मचारियों को मिलने वाला भुगतान सीमित हो सकता है।
दूसरी ओर, बड़ी निजी कंपनियों के बाजार में आने में देरी हो रही है। पिचबुक के आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी निजी कंपनियों का कुल मूल्यांकन लगभग 5.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के विशेषज्ञ जे रिटर के अनुसार, शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की औसत उम्र भी बढ़कर लगभग 14 वर्ष हो गई है।
टेंडर ऑफर और नए वित्तीय विकल्प
कर्मचारियों को नकदी उपलब्ध कराने के लिए कुछ कंपनियां टेंडर ऑफर भी ला रही हैं। इसके तहत कंपनी या अन्य निवेशक कर्मचारियों के कुछ शेयर खरीद सकते हैं। नैस्डैक प्राइवेट मार्केट पर ऐसे सौदों का कुल मूल्य 2023 में लगभग 3 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में करीब 15 अरब डॉलर हो गया।
वहीं, टेकडॉलर और सेफी जैसी कंपनियां निजी स्टार्टअप शेयरधारकों को उनके शेयरों के बदले वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के क्षेत्र में काम कर रही हैं। सेफी के अनुसार, कंपनी निजी स्टार्टअप शेयरधारकों की हिस्सेदारी के आधार पर लगभग एक अरब डॉलर की फाइनेंसिंग में मदद कर चुकी है।
कुल मिलाकर, शेयरों के बदले लोन लेना निजी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए नकदी जुटाने का एक नया रास्ता बन सकता है। लेकिन इसमें संभावित लाभ के साथ ब्याज, टैक्स और शेयरों के मूल्य में गिरावट जैसे जोखिम भी जुड़े हैं। इसलिए ऐसा कोई फैसला लेने से पहले लोन की शर्तों और अपनी वित्तीय स्थिति को अच्छी तरह समझना जरूरी है।